Posts Tagged ‘Hindi

24
Jun
12

अहिंसा प्रतिहिंसा

किसीको गिराना हो 

लात न मारो..
किसको मारना ही है
शेर न बनो..
 
प्रतिशोध को नियंत्रण नहीं
सिर्फ उसे धैर्य के पंख दो
फिर उड़ने दो अपने आकाश में
तल्लीन अपने ही साजिश में
 

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किसीको गिराना हो 
लात न मारो, सीढ़ी हटा दो..  
किसको को मारना ही है
शेर नहीं, दीमक बनो.. 
01
Jun
12

Hosla

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Bhukkad Zindagi Mein Niwaala Na Miley

Tooti Kamar Ko Sahaara Na Miley

Bus Aagey Badhna Hai Gar Hai Hosla Toh Bol

Fir Zakhmi Pairon Se Bhi Raasta Tu  Khoj..

 

Berehmi Ke Patthar Khud Hi Tujhse Takraayein

Footi Kismat Ki Cheekh Jab Tu Na Soon Paayein

Marham Ki Muskuraahat Apne Jism Pe Tu Mal

Mudke Na Dekh, Tu Bus Chala Chal..

 

Khoon Ka Thakka Jo Mastakk Pe Tikey

Kaali Raat Ki Jab Tujhe Subah Na Dikhey

Uss Raat Ko Dosti Ka Vaasta Deke Bol

Bus Aagey Badhna Hai Gar Hai Hosla Toh Bol

01
Jun
10

Joker

आज तो हद्द हो गयी
ताश के खेल में सोचा
के यहाँ तो राजा बनूंगा
लेकिन हर बाज़ी इधर भी हारा
कोई तो कहता मुझे
राजा ही ताश में हारते है
थोड़ा तो में मुस्कुराता
मगर लोगो ने मुझे
ज़ोर से चाँटा और धक्का मारा
फिर घुलाम का पत्ता थमाकर
शायद ग़लती से ही..
जोकर कह दिया..
हा हा हा हा..

जोकर कह दिया..
जोकर..
राजा नही, घुलाम नही,
घुलाम को ही..
जोकर कह दिया..

27
Feb
10

नकली तलवार

उठाओ तलवार
और काट दो सबके धड़
कोई विभेद नही
कोई निषेद नही
वो भूखी तलवार भी
आज बेकरार है
वो खून भी हो चाहे
आज उसके लिए व्यर्थ है
आज मारो तो शान से
मरो तो शहीद
शवों के नक्शे बनाते है
रास्तो की नादिया बनाते है
अपने शहर का निर्माण करते है!
लिखने वाले का क्या जाता है? बोलने वाले का कोई क्या कर लेगा? मगर मरते तो यही है ना, जो यह खोखली बातों से प्रेरणा लेते है. और फिर कोई नही पूछता उनके घर वालो से. कोई परमवीर चक्र नही, क्यूंकी यह वीरता ही नही! जब सैनिक ही ना हो तो सेना किस काम की?
06
Feb
10

रंगों की होली

आज तू बंदूक से बारूद को फूँक दे
इस बदनसीब को थोड़ा तो सुकून दे
अमन के बुझे चिराग को आज तू
अपनी ही दोस्ती से रोशन कर दे..

तेरे झंडे का सफेद में ही हूँ
मेरे में भी तू हरा होके लहराता है
तेरा मेरा छोड़के आज हम मुल्को को मिलाते है
सरहद पार आज हम इन रंगों की होली खेलते है

मिल्के एक दूसरे को पिछले दिनो के
वो किस्से सुनाते है
मज़हबी लकीर के बनाए
वो हिस्से मिलाते है

तू एक बार इस पार आके तो देख
अरे तू दोस्ती का पत्थर उठा के तो फेक
तब तक फेक जब तक तेरी भूंक नही मिटती
फिर में देखता हूँ के नफ़रत की काँच कैसे नही टूटती..

06
Feb
10

केस की सुनवाई

में कहता हूँ खड़ा करो
इनसानियत की अदालत में दोनो को
बर्दाश्त करने की हद्द होती है
ग़लती करने की भी सरहद होती है!

क्यू इतना हिंसक होता है इंसान?
क्यू अपनो की गर्दन काटता है वो?
क्यू एक ही गलिति करता है लगातार?
के आख़िर मुर्दो की दीवार बनाता है वो?

क्यू इतना होश गवाता है वो
के अपनो को ही बेहोश करें
क्यू इतना गिर जाता है वो
के अपनी ही लाश से टकरा जाए..

इतनी नफ़रत भरी हेई आज दिल में
के खुद दोषी होने का एहसास ही नही?
करदो एक बार इस केस की सुनवाई
सरहद के इस पार या तो उस पार!

06
Feb
10

Aman ka Pujaari

एक दिन छोड़ देगा वो सुबको
भूल जाएगा तो बस यादें
गायब.. कहीं भी जहाँ शोर ना हो ज़्यादा
कहीं भी जहाँ लोग ना हो ज़्यादा

२ रुपए के ख्वाब दिखा के
ज़िम्मेदारियो से दूर जाके
खो जाएगा कहीं वो
अपनी ही दुनिया में वो..

फिर लोग कहेंगे साथ मिलके
साला शराब बहोत पीता था
बातें बहोत करता था
कुछ ज़्यादा ही सोचा करता था.

सपने बड्डे देखता था
हेमेश्ा खुश रहता था
गल्ली मोहले को छोड़के
देश की बातें करता था

एक दिन सरहद पर नही चलेगी गोली
कोई नही खेलेगा तब खून की होली
पागल था वो जो इस दिन का सपना देखता था
अमन का पुजारी था वो,जो कभी नही हारा था….
जो कभी नही हारा था..

लेकिन उस दिन पता नही क्या हुआ
बुरा लगा उसे अपनो की बातों का
सच में छोड़ गया वो जैसे
उसे कभी वापस आना ही नही था……….




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